"जिस्मों पर हक मिल जाते है बेशक रीति रिवाजों से "रूह"जिसकी दीवानी है उसे ही तो इश्क कहते है" -------------------------------------------------------------- "96" ये मूवी आज फिर से देखी....अब तो शायद याद भी नहीं...कितनी बार आज की इंस्टेंट 2 मिनट्स मैगी वाली पीढ़ियों के तो ऊपर से गुजर जाएगी ये लव स्टोरी…... प्रेम की तीव्रता....ठहराव....समर्पण...पवित्रता सब कुछ तो है.... होती है,ऐसी भी अपवाद सी मोहब्बत आज के दौर में भी जिसके फ़साने नहीं लिखे जाते, न बोले जाते.... न ही सुने जाते.. वो तो सिर्फ..... जिए जाते है....."96" उनकी ही कहानी है 🥲
कितना विरोधाभास है इस आभासी दुनियां और प्रत्यक्ष में "आज एक रील देखी जिसमे एक मजदूर के 1.5 लाख फॉलोअर है और उसकी उस रील में लाइक्स कर रहे है जहां वो "बोरी बासी" खाने की वीडियो सांझा कर रहा था......यानी बासे चावल को पानी में नमक आदि मिला कर खाने की बरसो पुरानी परंपरा बेहद पढ़े लिखे उसके फॉलोअर्स है और कमेंट्स द्वारा इस भोजन पर जबरदस्त वैज्ञानिक ज्ञान दे रहे है "फर्मेंटेड राइस वॉटर"...लिख अपना अतिशय ज्ञान बधार रहे है ये तो हुई आभासी दुनियां....अब अगर वो अपने आभासी दुनियां के मित्रो की इस तारीफ से अभिभूत हो ऐसे सो कॉल्ड कॉरपोरेट ज्ञानियों के ऑफिस में उसी वेशभूषा मै "बोरी बासी" खिलाने पहुंच जाए तो....क्या होगा "आभासी दुनियां का भ्रम टूट जाएगा....उस गरीब का"
2010-2011 का दरम्यानी दौर था जब कंपनी ने मेरा ट्रांसफर बिहार के सुदूर कोने सासाराम और कैमूर डिस्ट्रिक्ट में कर दिया था दोनों ही डिस्ट्रिक्ट में उस समय नक्सलवाद और अपराध चरम पर था विद्युत विभाग की तो ये हालत थी कि हफ्तों तक विद्युत सप्लाई ही नहीं होती थी और उसके ऑप्शन स्वरूप लोकल जनरेटर वाले का धंधा चरम पर था...आपको याद होगा जैसे कुछ समय पूर्व आपके मोहल्ले में लोकल डिश वाला आकर आपको महीने की निश्चित राशि अनुसार कनेक्शन देता था और अगर दो टीवी है तो उस अनुसार किराया तय होता था....वहां भी प्रति पॉइंट 500₹ किराया तय था...और आश्चर्यजनक तरीके से विद्युत विभाग द्वारा घर घर फैलाए तारों के जाल से ही वो अपनी जनरेटर विद्युत सप्लाई करते थे....बिहार के कोई पुराने जानकार आज भी ये बता देंगे बिहार...नाम सुन ही वहां ट्रांसफर के लिए मना कर दिया जाता था...खैर अप्रैल 2010 की बात है मै देहरी ऑन सोन स्टेशन में देर रात्रि उतरा....उम्मीद के विपरीत स्टेशन और बाहर का बाजार देर रात भी गुलजार था...रिक्शे वाले ने उस समय मौजूद सबसे अच्छे होटल ...होटल सोन भद्र...या ऐसा ही कुछ नाम था जो शहर के बीच से गुजरती ग्रैंड ट्र...
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